'आँगन के पार द्वार' (प्रकाशन वर्ष १९६१) में संगृहीत 'असाध्य वीणा' अज्ञेय की संभवतः सबसे लम्बी कविता है।
Friday, 24 August 2012
Thursday, 23 August 2012
पल्लव सुमित्रानंदन पंत का तीसरा कविता संग्रह है जो 1928 में प्रकाशित हुआ था
सौ पदों में लिखी गयी तुलसीदास निराला की सबसे बड़ी कविता है, जो कि 1934 में लिखी गयी
'कामायनी' आधुनिक हिन्दी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है।इसका प्रकाशन सन १९३६ में हुआ।
दीपशिखा महादेवी वर्मा का पाँचवाँ कविता-संग्रह है। इसका प्रकाशन १९४२ में हुआ
४३ में 'चिन्ता' का प्रकाशन हुआ । निराला के '
कुकुरमुत्ता' का प्रकाशन भी इसी वर्ष हुआ । १ ९४३ का अपना महत्व
है, जब अज्ञेय के संपादन में भार सप्तक' का प्रकाशन हुआ
कुकुरमुत्ता' का प्रकाशन भी इसी वर्ष हुआ । १ ९४३ का अपना महत्व
है, जब अज्ञेय के संपादन में भार सप्तक' का प्रकाशन हुआ
Sunday, 19 August 2012
topi shukla rahi masum raza
सूनी घाटी का सूरज · अज्ञातवास · रागदरबारी · आदमी का ज़हर · सीमाएँ टूटती हैं मकान · पहला पड़ाव · विश्रामपुर का सन्त · अंगद का पाँव · यहाँ से वहाँ · उमरावनगर में कुछ दिन |
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Ras Purush Pt. Vidyanivas Mishra - A Hindi Book by - Narmada ...
pustak.org/home.php?bookid=7902संचितआपने इसे सार्वजनिक रूप से +1 किया है. पूर्ववत् करेंउनके प्रमुख निबंध संग्रह हैं—'छितवन की छाँह', 'अंगद की नियति', 'आँगन का पंछी और बंजारा मन', 'कँटीले तारों के आर-पार', 'कौन तू फुलवा बीननिहारी', 'गाँव का मन', 'मेरे राम का मुकुट भीग रहा है', ' तमाल के झरोखे से', 'साहित्य की चेतना', 'परंपरा बंधन नहीं', ...
रत्नप्रभसूरि का कुवलयमालाकथा
- Ratnaprabha Suri (1181 A.D.). Ratnaprabha Suri
- रोड-त राउलवेल 12 vi sadi
उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण - विकिपीडिया
- १२वीं शती का पूर्वार्द्ध माना जाता है।
- 14वीं शताब्दी के ग्रन्थ श्री ज्योतिरिश्वर ठाकुर कृत वर्णरत्नाकर
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