आंसू' .. "जो घनीभूत पीड़ा थी मस्तक में स्मृति सी छाई दुर्दिन में आंसू बनकर वह आज prasad
जी हाँ हुजूर, मैं गीत बेचता हूँ ।
गीत-फ़रोश / भवानीप्रसाद मिश्र
मैं तरह-तरह के
गीत बेचता हूँ ;
मैं क़िसिम-क़िसिम के गीत
बेचता हूँ ।
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