जो घनीभूत पीड़ा थी
मस्तक में स्मृति-सी छायी
दुर्दिन में आँसू बनकर
वह आज बरसने आयी। आँसू_/_जयशंकर_प्रसाद_
मस्तक में स्मृति-सी छायी
दुर्दिन में आँसू बनकर
वह आज बरसने आयी। आँसू_/_जयशंकर_प्रसाद_
मौन-निमंत्रण-सुमित्रानन्दन पंत
सखि वे मुझसे कह कर जाते / मैथिलीशरण गुप्त
राजभाषा हिंदी: साहित्यकार :: श्रीराम शर्मा
raj-bhasha-hindi.blogspot.com/2010/11/blog-post_01.html
1 दिसं 2010 – शर्माजी हिंदी-साहित्य में रेखाचित्र-संस्मरण(रिपोर्ताज) विधाओं के जन्मदाता माने जाते हैं। इस क्षेत्र में उनके प्रसिद्ध ग्रंथ हैं-बोलती प्रतिमा, वे जीते कैसे हैं, संघर्ष और समीक्षा, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, सेवाग्राम ...
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